जगदलपुर. बस्तर में रेल सुविधाओं के लिए दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों के नेताओं द्वारा अनिश्चितकालीन आन्दोलन कर रेल प्रशासन पर दबाव बनाकर बस्तर में रेल सुविधाओं की दिशा में कुछ कामयाबी हासिल की थी, लेकिन जोरानाला विवाद भी बस्तर में रेल सुविधाओं की मांग की तरह ही लम्बा है लेकिन इस मामले पर अभी तक किसी भी राजनैतिक पार्टी के द्वारा ऐसा कोई आन्दोलन नहीं किया गया है की जोरानाला में बह रहा पानी जगदलपुर तक पहुँच सके. गौरतलब है की इस वर्ष भी जोरानाला संगम पर रेत की बोरियां दाल कर पानी को जगदलपुर की दिशा में बहाने का असफल प्रयास किया जा रहा है.
कांग्रेसी ही खोद रहे हैं कांग्रेसी की कब्र !
© लेखक | February 1, 2012 - 11:11 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. बस्तर में इतिहास एक बार फिर दोहराया जा रहा है, एक बार फिर कांग्रेसी छटवीं अनुसूची के मुद्दे पर एक दुसरे को निपटाने का काम कर रहे हैं, जिसका फ़ायदा आगामी विधान सभा चुनाव में निश्चित ही भाजपा को मिलेगा. गौरतलब है की प्रदेश संघठन इस पुरे मामले पर मूकदर्शक बना तमाशा ही देखता प्रतीत हो रहा है, जब बस्तर में कांग्रेसी ही आपस में भिड़ने लगेंगे तो किस तरह से कांग्रेस मज़बूत होगी यह ऐसा सवाल है जो बस्तर के सभी कट्टर कांग्रेसियों को परेशान कर रहा है.
सैमसंग गैलेक्सी वाई – एक बेहतरीन मोबाइल फ़ोन !
© लेखक | January 30, 2012 - 3:26 PM को प्रकाशित किया गया.
मोबाइल निर्माता कंपनियों में आज सैमसंग का नाम सबसे अधिक हो रहा है. इस कंपनी के मोबाइल उत्पादों को प्रयोग करने में युवा वर्ग सबसे आगे हैं. इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए मैं आपको “सैमसंग गैलेक्सी वाई” के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताना चाह रहा हूँ, जिसे हाल ही में सैमसंग कंपनी ने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में लांच किया है.
बस्तर का एक आदर्श वनग्राम – माचकोट
© लेखक | January 29, 2012 - 8:45 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. बस्तर जिले में घने वनों से आच्छादित वन ग्राम “माचकोट” में जहाँ आज 45 परिवार निवासरत हैं, सन 1915 में मात्र 50 हेक्टेयर वन भूमि, कृषि हेतु प्रदान कर 20 परिवारों को बसाया गया था. धुरवा जनजाति बहुल इस क्षेत्र में पिछड़ी जाति के भी कुछ परिवार शामिल हैं. इसे एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने में बस्तर वन मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ग्राम के वन प्रबंधन समिति की एक महिला सदस्य ने वर्ष 2007 में समिति की एक बैठक में यह जिज्ञासा व्यक्त की थी कि क्या इस गाँव के लोग पक्के मकानों में नहीं रह सकते ? और वन विभाग ने इस महिला सदस्य के सपने को साकार कर दिखाया.
कैसे गर्व से कहें की हम भारतीय हैं ?
© लेखक | January 29, 2012 - 11:13 AM को प्रकाशित किया गया.
हमें आज कहते हुए बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है कि हम हिन्दुस्तानी है, हो भी न क्यों ? जहाँ उच्च जाति वाले लोग निम्न जाति वाले से नफ़रत करते है. लक्ज़री गाडियों से चलने वाले ऑटो वाले से नफ़रत करते है. यहाँ पर कि बड़े शहरों में रहने वाले लोग गाँव से आने वाले लोगों से नफ़रत करते है. जहाँ एक राज्य के लोग दुसरे राज्य के लोग से नफ़रत करते है. अंग्रेजी बोलने वाले लोग हिंदी भाषी से नफ़रत करते है. जहाँ नज़र पड़ती है वहां नफरत ही भरी हुई है, जहाँ आये दिन कोई न कोई मुद्दा बनता रहता है.









