इस शक्श को हमारी दुनिया छोड़े हुए लगभग 34 वर्ष हो चुके हैं, पर इनका चेहरा आज भी दुखी दिलों को ख़ुशी के चंद लम्हे दे जाता है. इनकी शक्सियत के विषय में मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा की “हँसते हुए तो सभी जाते होंगे, पर जाते-जाते भी हंसा गया वो !“. इनकी जीवनी बड़ी ही खुशमिजाज़ थी. ऐसा कहा जाता है की अपनी निजी व असली ज़िन्दगी में भी इन्होने अपने किरदार को इस तरह ढाल लिया था की इनकी असली ज़िन्दगी को देख कर भी लोग ऐसा सोचने पर मजबूर हो गए थे की मानो वे अब भी किसी किरदार को निभा रहे हैं.
कारगिल हाईटस – शहीद जवानो को समर्पित एक स्थान
© लेखक | January 6, 2012 - 1:03 PM को प्रकाशित किया गया.
कल घर पर बैठे-बैठे बोर हो रहा था. सोचा थोड़ी देर टी. वी. लगा लेता हूँ, थोडा टाइम पास हो जायेगा. एक चैनल पर रिमोट का बटन दबाते-दबाते रुक गया, एक बहुत ही मार्मिक फिल्म दिखाई जा रही थी. फिल्म का नाम था “धूप” जिसमे “ओम पूरी साहब” और “रेवती” ने मुख्य भूमिका निभाई है. हालाँकि मैंने यह फिल्म पहले नहीं देखी है, पर 5 मिनट देखने के बाद मुझे इसकी भूमिका समझ आई, फिर आखिर तक मैंने इस फिल्म को देखा. इस फिल्म में बड़े ही सहजता के साथ सभी ने अपना किरदार अदा किया है.
मैं इस फिल्म की झलक आपको बताने से पहले इतना ही कहना चाहूँगा की यह फिल्म सभी भारतीय दिलों में बसे एक देशभक्ति की भावना को बढाती है और कारगिल में शहीद हुए उन हज़ारों-लाखों वीर जवानों को सलाम करती हुई भारत एवं समाज में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ, एक महावीर चक्र धारक, भारत के जांबाज़ सैनिक के माता-पिता की लड़ाई को भी दर्शाती है. वर्ष 2003 में प्रदर्शित इस फिल्म के निर्देशक “अश्विनी चौधरी” एक ख्याति प्राप्त व्यक्ति भी है. नैय्यर के ही किरदार को एवं कारगिल युद्ध को दर्शाती, वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म “एल ओ सी कारगिल” में बालिवूड के सुपर स्टार “सैफ अली खान” के द्वारा बखूभी निभाया गया था.
“मिक्की माउस” का अंत कभी नहीं हो सकता !
© लेखक | December 30, 2011 - 5:05 PM को प्रकाशित किया गया.
आज के इस लेख को मैं उन करोड़ों बच्चो को समर्पित करना चाहता हूँ जो अपना आधा से ज्यादा समय अपने टी. वी. के सामने कार्टून देखते हुए बिताते हैं. खैर, मैं आपके सामने एक तस्वीर रख रहा हूँ जिसे देखकर आपको यह बताना होगा की इस तस्वीर के किरदार का नाम क्या है ?
सितारों से आगे है बस्तर …
© लेखक | December 28, 2011 - 4:51 PM को प्रकाशित किया गया.
बस्तर शुरू से ही देशी विदेशी पर्यटकों को लुभाता आया है. 1960 में बीबीसी ने अबूझमाडिया के जनजीवन पर आधारित एक फिल्म बनाये थी जिसमे नारायणपुर के चेंद्रू ने मुख्य भूमिका निभाई थी इसके बाद से बस्तर रातो रात अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में छा गया. जी हाँ, यह वही चंद्रू है जो आज अपने बेटे की लिए सरकारी नौकरी की आस में सरकार से उम्मीद लगाये बैठा है. हम बात करने जा रहे है बालीवुड के सितारों में बस्तर का क्या स्थान रहा हैं ?
जब 1980 में स्व. देवानंद साहब ने बस्तर में कदम रखा तो कॉलेज के छात्रो के बीच वे रूबरू हुए, और सीधे चित्रकोट निकल गए. स्व. देवानद साहब का प्रिय स्वेटर कांकेर के पास किसी ने “पार” कर दिया था. वैसे देवानंद के पहले शम्मी कपूर भी 1970 में बस्तर की छटा से अभिभूत हो चुके थे. वे बीजापुर और कुटरू के जंगलो में काफी समय बिताये.
वीणा को वीजा क्यूँ दिया गया – बाल ठाकरे बनाम वीणा मालिक
© लेखक | December 22, 2011 - 12:30 AM को प्रकाशित किया गया.
“वीणा मालिक द्वारा की गयी करतूत, हमारे समाज और हमारी संस्कृति पर कालिख पोतने वाली है. डॉली बिंद्रा द्वारा पहले ही वीणा मालिक पर आई.एस.आई. एजेंट होने का आरोप लगाया जा चुका है. यदि इस आरोप में ज़रा भी सच्चाई है तो वीणा को तुरंत उसके नरक (पाकिस्तान) भेज दिया जाना चाहिए और भारत में उससे फैली गन्दगी को साफ़ कर देनी चाहिए.”
मुंबई. ये शब्द शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने वीणा के विरुद्ध कहा. ठाकरे, सीधे तौर पर अपने पार्टी के मुखपत्र में “वीणा मालिक को आरक्षण” नमक शीर्षक से एक सम्पादकीय लिखी है, जिसमे उन्होंने खरे-खरे शब्दों में वीणा मालिक को काफी बातें बोल दी हैं, और कहा है की वीणा को इस देश से गन्दगी स्वरुप बहार निकाल फेंकना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है की भारत में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है, परन्तु वीणा मालिक जैसे पकिस्तान से आने वाले गंदगियों के लिए यह आरक्षण कतई नहीं है, और इसे वर्जित कर देना चाहिए.








