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कारगिल हाईटस – शहीद जवानो को समर्पित एक स्थान

captain anuj naiyyar कारगिल हाईटस   शहीद जवानो को समर्पित एक स्थान

कप्तान अनुज नैय्यर

कल घर पर बैठे-बैठे बोर हो रहा था. सोचा थोड़ी देर टी. वी. लगा लेता हूँ, थोडा टाइम पास हो जायेगा. एक चैनल पर रिमोट का बटन दबाते-दबाते रुक गया, एक बहुत ही मार्मिक फिल्म दिखाई जा रही थी. फिल्म का नाम था “धूप” जिसमे “ओम पूरी साहब” और “रेवती” ने मुख्य भूमिका निभाई है. हालाँकि मैंने यह फिल्म पहले नहीं देखी है, पर 5 मिनट देखने के बाद मुझे इसकी भूमिका समझ आई, फिर आखिर तक मैंने इस फिल्म को देखा. इस फिल्म में बड़े ही सहजता के साथ सभी ने अपना किरदार अदा किया है.

मैं इस फिल्म की झलक आपको बताने से पहले इतना ही कहना चाहूँगा की यह फिल्म सभी भारतीय दिलों में बसे एक देशभक्ति की भावना को बढाती है और कारगिल में शहीद हुए उन हज़ारों-लाखों वीर जवानों को सलाम करती हुई भारत एवं समाज में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ, एक महावीर चक्र धारक, भारत के जांबाज़ सैनिक के माता-पिता की लड़ाई को भी दर्शाती है. वर्ष 2003 में प्रदर्शित इस फिल्म के निर्देशक “अश्विनी चौधरी” एक ख्याति प्राप्त व्यक्ति भी है. नैय्यर के ही किरदार को एवं कारगिल युद्ध को दर्शाती, वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म “एल ओ सी कारगिल” में बालिवूड के सुपर स्टार “सैफ अली खान” के द्वारा बखूभी निभाया गया था.

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सितारों से आगे है बस्तर …

dev anand सितारों से आगे है बस्तर ...

स्व. देवानंद साहब

बस्तर शुरू से ही देशी विदेशी पर्यटकों को लुभाता आया है. 1960 में बीबीसी ने अबूझमाडिया के जनजीवन पर आधारित एक फिल्म बनाये थी जिसमे नारायणपुर के चेंद्रू ने मुख्य भूमिका निभाई थी इसके बाद से बस्तर रातो रात अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में छा गया. जी हाँ, यह वही चंद्रू है जो आज अपने बेटे की लिए सरकारी नौकरी की आस में सरकार से उम्मीद लगाये बैठा है. हम बात करने जा रहे है बालीवुड के सितारों में बस्तर का क्या स्थान रहा हैं ?

जब 1980 में स्व. देवानंद साहब ने बस्तर में कदम रखा तो कॉलेज के छात्रो के बीच वे रूबरू हुए, और सीधे चित्रकोट निकल गए. स्व. देवानद साहब का प्रिय स्वेटर कांकेर के पास किसी ने “पार” कर दिया था. वैसे देवानंद के पहले शम्मी कपूर भी 1970 में बस्तर की छटा से अभिभूत हो चुके थे. वे बीजापुर और कुटरू के जंगलो में काफी समय बिताये.

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वीणा को वीजा क्यूँ दिया गया – बाल ठाकरे बनाम वीणा मालिक

veena malik 2 वीणा को वीजा क्यूँ दिया गया   बाल ठाकरे बनाम वीणा मालिक

वीणा मालिक

“वीणा मालिक द्वारा की गयी करतूत, हमारे समाज और हमारी संस्कृति पर कालिख पोतने वाली है. डॉली बिंद्रा द्वारा पहले ही वीणा मालिक पर आई.एस.आई. एजेंट होने का आरोप लगाया जा चुका है. यदि इस आरोप में ज़रा भी सच्चाई है तो वीणा को तुरंत उसके नरक (पाकिस्तान) भेज दिया जाना चाहिए और भारत में उससे फैली गन्दगी को साफ़ कर देनी चाहिए.”

मुंबई. ये शब्द शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने वीणा के विरुद्ध कहा. ठाकरे, सीधे तौर पर अपने पार्टी के मुखपत्र में “वीणा मालिक को आरक्षण” नमक शीर्षक से एक सम्पादकीय लिखी है, जिसमे उन्होंने खरे-खरे शब्दों में वीणा मालिक को काफी बातें बोल दी हैं, और कहा है की वीणा को इस देश से गन्दगी स्वरुप बहार निकाल फेंकना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है की भारत में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है, परन्तु वीणा मालिक जैसे पकिस्तान से आने वाले गंदगियों के लिए यह आरक्षण कतई नहीं है, और इसे वर्जित कर देना चाहिए.

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Three Idiots फिल्म से मिली नयी जानकारी …

अब आप सोच रहे होंगे की यह कैसा शीर्षक मैंने डाल दिया है. शुरू में मैंने भी यही सोचा था, जब इस फिल्म को देख रहा था. मेरे ख्याल से आप सभी ने यह फिल्म देखी होगी. मैंने इस लेख को लिखने से सिर्फ 10 मिनट पहले ही फिल्म का Climax, 10वें बार देखा. एक शब्द में कहूँ तो – ‘सीख‘! समझे नहीं न ! मेरे कहने का मतलब है की यह फिल्म बहुत कुछ सिखाती है, इसके अलावा बहुत सी नयी जानकारी भी हमें मिलती है.

pen for astronauts Three Idiots फिल्म से मिली नयी जानकारी ...

शून्य गुरुत्वाकर्षण पेन

फिल्म में एक किरदार (वीरू सहस्त्र बुद्धे) बोमन ईरानी द्वारा निभाया गया है, बहुत ही सझे हुए और उम्दा कलाकार हैं वो, और उनकी इस फिल्म में कलाकारी देखते ही बनती है. अब आप सोच रहे होंगे की आज मैं कहाँ एक फिल्म को लेकर बैठ गया हूँ, रवि राज को कुछ लिखने को नहीं मिला तो शुरू हो गए एक पुरानी फिल्म के विषय में लिखने के लिए. मैं आपको बताना चाहूँगा की इस फिल्म में बोमन ईरानी द्वारा, अमीर खान के एक सवाल का जवाब दिया जाता है. अब सवाल क्या था और जवाब क्या था यह मैं आपको बताता हूँ:

सवाल (अमीर खान द्वारा): सर, अगर स्पेस में Fountain पेन, Ball पेन चलता नहीं है, तो फिर Astronauts ने पेंसिल का इस्तेमाल क्यूँ नहीं किया ?

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माँ-बाबा जैसे शब्दों से दूर होते बच्चे…

शाम की चाय पी रहा था, अचानक मैंने अपने माँ को पास में ही बिस्तर पर लेटे हुए देखा, उनकी तबियत थोड़ी ख़राब है. बस, चाय की चुस्कियों के साथ मन में एक ही ख्याल आ रहा था, आज के बच्चे अपने माँ-बाबा के लिए कौन सा वो काम करते हैं, जिनसे उन्हें ख़ुशी का एहसास हो. माँ तो आखिर माँ है, बच्चे की हर गलती माफ़, वो जो करे सर आँखों पर ! पर क्या बच्चे इस माँ की असीम ममता का क़र्ज़ कभी उतार पाते हैं ? इस विषय में चर्चा करने से पहले मैं एक छोटी कहानी से इसे शुरू करना चाहता हूँ -

“एक बार एक गाँव में ज़ोरदार बाढ़ आई, पूरा गाँव डूब रहा था, तभी एक बाबा (पिताजी) ने अपने बच्चे से कहा, बेटा तुम मेरा हाथ पकड़ लो, नहीं तो इस तेज़ बाढ़ में बह जाओगे, बच्चे ने जवाब दिया – नहीं बाबा आप मेरा हाथ पकड़ लीजिये. पिताजी हैरान रह गए, अपने बच्चे से कहा, बेटा दोनों का अर्थ एक ही है. तब उस मासूम ने कहा नहीं पापा दोनों अलग-अलग बातें हैं, मैंने आपका हाथ पकड़ा तो शायद मैं डर के मारे छोड़ दूंगी, पर मुझे पक्का यकीन है की आप मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे.”

इस छोटी सी कहानी का अर्थ आप ही ढूंड लीजिये. हालाँकि, यह कहानी मुझे भी मेरे किसी दोस्त ने सुनाई थी, काफी पुरानी बात हो गयी, पर इसे मैं आज तक भुला नहीं पाया हूँ, न ही कभी भुला पाऊंगा.

mothers love1 माँ बाबा जैसे शब्दों से दूर होते बच्चे...

एक माँ का अपने बच्चे के प्रति प्यार

खैर, एक छोटा सा सवाल, माँ-बाबा शब्द का अर्थ कोई बता सकता है ? कोई कहता है, भगवान्, कोई जन्म दाता इत्यादि… पर मैं कहूँगा की इसका अर्थ निकालना ही इन दो शब्दों का अपमान होगा. यह दो शब्द शायद इस धरती पर तब से हैं, जब से भगवानों का जन्म हुआ होगा… (व्यंग्य)

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