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गोल-गट्टम रगड़-पट्टम तड़ातड मार प्रतियोगिता !

wggrace गोल गट्टम रगड़ पट्टम तड़ातड मार प्रतियोगिता !

डब्ल्यू. जी. ग्रेस - 1683

शायद उपरोक्त शीर्षक आपको कुछ अजीब सा लग रहा होगा. हो भी क्यूँ नहीं ! दरअसल, यह पूरी दुनिया में खेले जाने वाले एक लोकप्रिय खेल का नाम है. अब आप सोचेंगे की यह कैसा नाम है ? उपरोक्त दिए गए शीर्षक का अर्थ है – “क्रिकेट“, बस हमने इसे थोडा लम्बा और शुद्ध हिंदी में कर दिया. थोडा विस्तार से समझाते हैं – “गोल-गट्टम” का अर्थ है “गोल-गेंद“, “रगड़-पट्टम” का अर्थ है “पिच” और अंत में है “तड़ातड मार प्रतियोगिता“, इसका अर्थ तो आप सभी अब तक तो समझ ही गए होंगे – “बल्ले के साथ जमकर मारो !

हम आपको बता दें की इस खेल का नाम “सज्जनों का खेल” के नाम से भी प्रसिद्ध है.

बुजुर्ग से लेकर छोटे-छोटे बच्चों तक क्रिकेट का भूत इस कदर सवार है की लोग पागलों की तरह क्रिकेट के दीवाने हैं. पर क्या आज तक किसी ने इस लाजवाब खेल के इतिहास को जानने की कोशिश की. अगर नहीं की तो कोई बात नहीं, आज हम आपको इसके संक्षिप्त इतिहास के बारे में बताएँगे.

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My humble beginning – Kapil Dev

kapil dev My humble beginning   Kapil Dev

कपिल देव

Do you know the great Kapil Dev has humble start. His childhood was as ordinary as anyone else.

Let’s have a look a brief sketch as he himself told to the media. Looking back at my life, i have come to the conclusion that our beginning never know our ends. For me it all started in Chandigharh, a small town nestling in the foothills of the Himalayas. I was born on a cold winter morning. My mother, who is a simple woman, could not read the time but she knew it was early in the morning . The date, 6 January 1959, was thankfully recorded because a cousin of mine was born on the same day, around the same time and with the same name! I grew up among six other brothers and sisters, all older than me, except one sister, who was a year younger.

My mother always regales me with tales of my naughty behaviour. She claims she never managed to control me then, and my wife claims she cannot control me now! But I do admit that right from the very beginning, I found it hard to sit still. I was very curious and it was my ambition to travel around the world and drive a Mercedes Benz! God has been kind to me and both my wishes have been fulfilled . But at that time, twenty-five years ago, these dreams seemed like castles in the air.

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कोच के डिमांड को सहवाग ने पूरा किया !!!

sehwag posing 238x300 कोच के डिमांड को सहवाग ने पूरा किया !!!चंडीगढ़. वीरेंद्र सहवाग ने चौका मार कर वनडे इतिहास का दूसरा दोहरा शतक पूरा किया तो दिल्ली में अपने घर पर टीवी के सामने बैठे उनके कोच एएन शर्मा का चेहरा खिल गया। मैं तो हमेशा ही वीरू को कहता था कि एक दो सौ तो दे दो यार। और देखिए उसने कर दिखाया। क्योंकि वही एक खिलाड़ी है जो ऐसा कर सकता है।

शर्मा ने कहा, ‘बचपन से ही वीरू का खेल आक्रामक रहा है। वह भी कहता था कि सर मैं पक्का कोशिश करूंगा कि कभी वनडे में दोहरा शतक बना पाऊं। मुझे उसकी काबिलियत पर कभी शक नहीं रहा। हर खिलाड़ी की एक शैली होती है। वीरू शुरू से ही काफी टफ रहा है। अगर मैं उससे डिफेंसिव प्लेयर बना देता तो जो वीरू आज है, वह नहीं दिखता।

यही कारण है कि पारी की पहली गेंद हो या फिर 99 रन पर खेल रहा हो, वह छक्का या चौका मारने में कभी नहीं हिचका। इस सीरीज में उसके न चल पाने पर काफी बातें हो रही थी। मैने उससे कहा कि तुम अपने शॉट्स के चयन में सावधानी बरतो और खेल पर फोकस रखो। जब उसे इंग्लैंड सीरीज से बाहर किया गया तो मैं भी निराश हो गया था। बस वापसी का एक ही हल था और वह थी मेहनत। वीरू ने कहा कि सर मैं मेहनत करूंगा बाकी किस्मत में हुआ तो मिल जाएगा।’

सहवाग ने किया महेंद्रा का धन्यवाद : दोहरा शतक जमाने वाले सहवाग ने पारी के बाद कमेंट्रेटर रवि शास्त्री के एक सवाल पर कहा, ‘मैं इस पारी के लिए बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा का धन्यवाद करना चाहता हूं। रणबीर सर ने मुझे बड़ा स्कोर बनाने के लिए उत्साहित किया था।

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