हमें आज कहते हुए बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है कि हम हिन्दुस्तानी है, हो भी न क्यों ? जहाँ उच्च जाति वाले लोग निम्न जाति वाले से नफ़रत करते है. लक्ज़री गाडियों से चलने वाले ऑटो वाले से नफ़रत करते है. यहाँ पर कि बड़े शहरों में रहने वाले लोग गाँव से आने वाले लोगों से नफ़रत करते है. जहाँ एक राज्य के लोग दुसरे राज्य के लोग से नफ़रत करते है. अंग्रेजी बोलने वाले लोग हिंदी भाषी से नफ़रत करते है. जहाँ नज़र पड़ती है वहां नफरत ही भरी हुई है, जहाँ आये दिन कोई न कोई मुद्दा बनता रहता है.
मानवता हुई शर्मसार…
© लेखक | January 26, 2012 - 5:04 PM को प्रकाशित किया गया.
कहीं ना कहीं इस संसार में परमात्मा का वास ज़रूर है, वरना इस संसार मे अनोखे लीलाएं नही होती, कभी-कभी इंसान समय से इतना आगे निकल जाता है की अपने विवेक पर काबू नही रखा पाता. हसने खेलने की आयु मे समाज के रीति-रिवाजों बड़ी ही कम उम्र में उठना पड़ता है. कुछ बातों को ले कर मैं हमेशा परेशान रहता हूँ. मै किसी भी घटना या होनी पर एक बार मे सहमत नही होता, जब तक वह घटना दोबारा ना हो और चाहे परिणाम पहले ही जैसा क्यों न हो.
21वीं सदी का भारत और 20वीं सदी की सोच…
© लेखक | January 26, 2012 - 2:30 PM को प्रकाशित किया गया.
भारत बदल रहा है, हम विकासशील देशों की श्रेणी मे गिने जा रहे है. हम तो 21वी सदी की ओर अग्रसर हो हैं पर हमारी सोच 20वी सदी की ही है. अगर हमे सही मायने मे तरक्की करनी है और अपने देश को खुशहाल राष्ट्र बनाना है तो, हमे अपनी सोच को बदलना होगा. आज का युवा वर्ग पहले से कहीं ज़्यादा समझदार और ज़िम्मेदार हो गया है. वह हर मामलों में खुल के सामने आ रहे है. चाहे वो अपनी जिंदगी की बात हो या अपने देश की, सभी क्षेत्रो मे वे भागीदारी कर रहे है.
आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई …
© लेखक | January 26, 2012 - 12:00 AM को प्रकाशित किया गया.
26 जनवरी का दिन है… यह दिन सम्पूर्ण भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज (26 जनवरी 2012) से ठीक 22645 दिन पूर्व 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया था. बताया जाता है की पुरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ का गणतंत्र सबसे विशाल है. इस दिन को पुरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ एक राजकीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है.
शून्य से शिखर तक…
© लेखक | January 25, 2012 - 11:52 PM को प्रकाशित किया गया.
आपके पास कितनी गोलाकार चीज़ें हैं, शायद अनगिनत ! क्या कभी आपने सोचा है की इन गोल चीज़ों का जन्म कहाँ से हुआ है ? अगर नहीं सोचा है तो मैं आपको बताता हूँ, यह सभी चीज़ें “शून्य” से ही बनी हैं. जी हाँ, वही शून्य जिससे 1 को 1000 और 1 लाख बनाया जा सकता है. आज की यह दुनिया, शून्य के बगैर नगण्य है, “शून्य” की उत्पत्ति से ही दुनिया काफी छोटी हो गयी है, उधाहरण के लिए एक वाहन को ही ले लीजिये, कोई भी लम्बा सफ़र हो – झट से पूरा हो जाता है.








