भारत प्राचीन काल से ही चमत्कारों का देश रहा है. संत, महात्माओं के इस देश में, 18वीं सदी में इस धरती पर साईं बाबा का जन्म हुआ था. हालाँकि इनके जन्म की कोई तात्विक प्रमाण नहीं मिलते हैं पर ऐसा माना जाता है की इनका जन्म 28 सितम्बर 1835 को हुआ था. साईं बाबा एक भारतीय संत थे और इनका पूरा जीवन शिर्डी में ही बीता. इनके अनुयायी आज पुरे विश्व में फैले हुए हैं और तो और लगभग 900 वर्षों के उपरांत भी इनके चमत्कार सुनने को मिलते हैं.
21वीं सदी का भारत और 20वीं सदी की सोच…
© लेखक | January 26, 2012 - 2:30 PM को प्रकाशित किया गया.
भारत बदल रहा है, हम विकासशील देशों की श्रेणी मे गिने जा रहे है. हम तो 21वी सदी की ओर अग्रसर हो हैं पर हमारी सोच 20वी सदी की ही है. अगर हमे सही मायने मे तरक्की करनी है और अपने देश को खुशहाल राष्ट्र बनाना है तो, हमे अपनी सोच को बदलना होगा. आज का युवा वर्ग पहले से कहीं ज़्यादा समझदार और ज़िम्मेदार हो गया है. वह हर मामलों में खुल के सामने आ रहे है. चाहे वो अपनी जिंदगी की बात हो या अपने देश की, सभी क्षेत्रो मे वे भागीदारी कर रहे है.
भारतियों में बसी एक अद्भुत कला – “मेहमान नवाजी”
© लेखक | January 18, 2012 - 6:47 PM को प्रकाशित किया गया.
आज मेरे फेसबुक के वॉल पर मैंने इस तस्वीर को देखा, इसमें लिखे वाक्यों को देखकर पहले तो खूब हँसा फिर बाद में सोचा की क्या वाकई भारत की मेहमान नवाजी, दुनिया के सभी जगहों से अच्छी है ? क्या हमारे यहाँ वाकई “मेहमान” शब्द को भगवान् का दर्जा दिया जाता है ?
भारत में प्रचलित एक पुरानी कहावत है “मेहमान, भगवान् का रूप होता है.”. मेरे घर, प्रत्येक एक-दो दिनों के अंतराल में कोई न कोई मेहमान आ धमकता है. अगर वह मेहमान कोई करीबी हो तो मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों को उनकी खातिरदारी करने में बड़ा मज़ा आता है क्यूंकि वे हमारी आदतों से लगभग परिचित होते हैं, किन्तु अगर कोई नया व्यक्ति आ धमके तो हमें अपने ही घर में अकेला सा महसूस होने लगता है. पर विद्वानों द्वारा यह बात भी सही कही गई थी की “किसी के घर ज्यादा जाने से हमारी ही इज्ज़त कम हो जाती है”, पर प्रत्येक घर आने वाला मेहमान यह नहीं समझता.
दुनिया में कोई काम मुश्किल नहीं होता – निक वुजिसिक
© लेखक | January 15, 2012 - 4:37 PM को प्रकाशित किया गया.
अगर आपके मन में किसी कार्य को करने की असीम ललक है, तो इस दुनिया का कोई भी काम मुश्किल नहीं होता, बस जरुरत होती है तो हिम्मत की, और उसी हिम्मत को जीने का माध्यम बनाकर निक वुजिसिक नामक यह शख्स, दुनिया का हर वो काम करता है, जो एक आम इंसान कर सकता है.
मैं आपको बता दूँ की इस लेख को लिखते वक्त निक के ऊपर मुझे किसी भी प्रकार का तरस नहीं आ रहा था, अपितु मुझे तो गर्व हो रहा था की हमारी दुनिया में ऐसे भी हौसलापरस्त लोग मौजूद हैं, जो अपनी ज़िन्दगी को काटते नहीं बल्कि जीते हैं और दूसरों को भी जीने की कला सिखाते हैं.
निक का जन्म 04 दिसम्बर 1982 को ब्रिसबेन शहर, ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. पेशे से निक एक कुशल धर्मवक्ता, अभिप्रेरक और जीवनोपदेश वाहक हैं. वे वर्तमान में “Life Without Limbs” नामक एक गैर-सरकारी संस्था के संस्थापक भी हैं.
विवाह – एक अनूठा बंधन … और वे सात वचन !
© लेखक | January 8, 2012 - 1:27 PM को प्रकाशित किया गया.
अगर आपकी शादी हो चुकी है तो मैं आपको मेरी तरफ से बधाई और उम्मीद करता हूँ की आप अपने जीवन और अपनी जीवनसाथी के साथ वे सात वचन ताउम्र बखूभी निभाएंगे. पर शायद ऐसा सभी नहीं करते. कई लोगों को तो यह भी नहीं पता होगा की यह साथ वचन हैं कौन से ?
कहा जाता है की मानव जीवन सबसे कठिन होता है, यह मैं नहीं कह रहा बल्कि करोड़ों वर्षों से शास्त्रों में भी यही लिखा गया है. लग्न-मंडप में वर एवं वधु के द्वारा सात फेरों के साथ ही साथ एक दुसरे से सात वचन लिए जाते हैं, जिन्हें ताउम्र वर-वधु को निभाना होता है. सबसे पहले मैं आपको इन सात वचनों से रूबरू करता हूँ:








