जगदलपुर. बस्तर में रेल सुविधाओं के लिए दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों के नेताओं द्वारा अनिश्चितकालीन आन्दोलन कर रेल प्रशासन पर दबाव बनाकर बस्तर में रेल सुविधाओं की दिशा में कुछ कामयाबी हासिल की थी, लेकिन जोरानाला विवाद भी बस्तर में रेल सुविधाओं की मांग की तरह ही लम्बा है लेकिन इस मामले पर अभी तक किसी भी राजनैतिक पार्टी के द्वारा ऐसा कोई आन्दोलन नहीं किया गया है की जोरानाला में बह रहा पानी जगदलपुर तक पहुँच सके. गौरतलब है की इस वर्ष भी जोरानाला संगम पर रेत की बोरियां दाल कर पानी को जगदलपुर की दिशा में बहाने का असफल प्रयास किया जा रहा है.
कांग्रेसी ही खोद रहे हैं कांग्रेसी की कब्र !
© लेखक | February 1, 2012 - 11:11 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. बस्तर में इतिहास एक बार फिर दोहराया जा रहा है, एक बार फिर कांग्रेसी छटवीं अनुसूची के मुद्दे पर एक दुसरे को निपटाने का काम कर रहे हैं, जिसका फ़ायदा आगामी विधान सभा चुनाव में निश्चित ही भाजपा को मिलेगा. गौरतलब है की प्रदेश संघठन इस पुरे मामले पर मूकदर्शक बना तमाशा ही देखता प्रतीत हो रहा है, जब बस्तर में कांग्रेसी ही आपस में भिड़ने लगेंगे तो किस तरह से कांग्रेस मज़बूत होगी यह ऐसा सवाल है जो बस्तर के सभी कट्टर कांग्रेसियों को परेशान कर रहा है.
बस्तर का एक आदर्श वनग्राम – माचकोट
© लेखक | January 29, 2012 - 8:45 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. बस्तर जिले में घने वनों से आच्छादित वन ग्राम “माचकोट” में जहाँ आज 45 परिवार निवासरत हैं, सन 1915 में मात्र 50 हेक्टेयर वन भूमि, कृषि हेतु प्रदान कर 20 परिवारों को बसाया गया था. धुरवा जनजाति बहुल इस क्षेत्र में पिछड़ी जाति के भी कुछ परिवार शामिल हैं. इसे एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने में बस्तर वन मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ग्राम के वन प्रबंधन समिति की एक महिला सदस्य ने वर्ष 2007 में समिति की एक बैठक में यह जिज्ञासा व्यक्त की थी कि क्या इस गाँव के लोग पक्के मकानों में नहीं रह सकते ? और वन विभाग ने इस महिला सदस्य के सपने को साकार कर दिखाया.
छत्तीसगढ़ … मेरी नज़रों से !
© लेखक | January 28, 2012 - 3:09 PM को प्रकाशित किया गया.
भारत के इस अभूतपूर्व राज्य का गठन 1 नवम्बर 2000 को किया गया था. भारत के 26वें राज्य के रूप में मशहूर इस क्षेत्र के नाम प्राचीन काल के दौरान “दक्षिण कौशल” का एक हिस्सा होने के कारण “छत्तीसगढ़” कर दिया गया था. यह कहा जा सकता है की छ. ग. का प्राचीन नाम “दक्षिण कौशल” ही था. प्राचीन काल से ही यह गढ़ प्राचीन संपदाओं और संस्कृतियों से लबालब भरा हुआ है.
वह स्कूल कहाँ से लायें… जो…
© लेखक | January 25, 2012 - 12:20 AM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. आज कल स्कूलों में पैसे कमाने की जैसे होड़ सी लगी हुई है. हम बात कर रहे है शहर के स्कूलों में लगने वाले “आनंद मेले” की, जिसमे “आनंद” के नाम पर सीधा लूट खसोट किया जा रहा है. पखवाड़े भर पहले लगे मेले की मैं बात कर रहा हूँ, जिसमे लगभग सभी नामचीन स्कूलों ने विद्यार्थियों में सहयोग की भावना जगाने के उद्येश से “आनंद मेले” का आयोजन किया था. जिसमे ऊँची कीमतों पर बाज़ार में बिकने वाले छोटे से छोटे आइटमो को बेचा गया.
एक नज़र डालें खाद्य सामग्रियों की कीमत पर – बाज़ार में बिकने वाला रु. 5/- का गोलगप्पा (पानीपूरी) यहाँ रु. 10/- में बिका … सोचने वाली बात तो यह है की एसी कौन सी मजबूरी थी जिसे पालक इन खाद्य सामग्रियों को दुगने दामो में भी बच्चो को खरीद कर देने के लिए तैयार हो गए. वहीं समोसा, आइसक्रीम, डोसा, केक इत्यादि की कीमतें भी आसमान छू रही थी.








