भारत के इस अभूतपूर्व राज्य का गठन 1 नवम्बर 2000 को किया गया था. भारत के 26वें राज्य के रूप में मशहूर इस क्षेत्र के नाम प्राचीन काल के दौरान “दक्षिण कौशल” का एक हिस्सा होने के कारण “छत्तीसगढ़” कर दिया गया था. यह कहा जा सकता है की छ. ग. का प्राचीन नाम “दक्षिण कौशल” ही था. प्राचीन काल से ही यह गढ़ प्राचीन संपदाओं और संस्कृतियों से लबालब भरा हुआ है.
कौन सफ़र करेगा जगदलपुर-रायपुर डिब्बे में ?
© लेखक | January 24, 2012 - 12:28 AM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. बस्तर को रायपुर रेल मार्ग से जोड़ने के लिए आन्दोलनकारियों ने एक एक्सप्रेस सेवा की मांग की थी लेकिन बस्तर से गए प्रतिनिधि मंडल को सिर्फ एक आरक्षित डिब्बा ही मिला है जो लगभग 225/- के किराये पर सोलह घंटों का सफ़र करते हुए राजधानी रायपुर पहुंचेगी. इसलिए, इस सुविधा को कितने बस्तरवासी इस्तेमाल करेंगे, इस पर सवालिया निशान इस योजना के घोषणा के साथ ही उठने लगे हैं.
समता एक्सप्रेस को जगदलपुर लाया जाएगा – सांसद
© लेखक | January 23, 2012 - 11:57 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. सांसद दिनेश कश्यप ने बताया की भाजयुमो के रेल रोको आन्दोलन का अच्छा प्रतिफल मिला है, आज़ादी के बाद पहली बार रेल मंत्रालय ने रेल सुविधाओं के विषय में गंभीरता दिखाई है.
उन्होंने बताया की आगामी रेल बजट में कोरापुट से चलने वाली समलेश्वरी एक्सप्रेस का जगदलपुर तक विस्तार के साथ ही साथ जगदलपुर को राज्य की राजधानी रायपुर से रेल मार्ग के माध्यम से जोड़ने हेतु सम्पूर्ण रेल के स्थान पर रेल का एक डिब्बा ही फिलहाल दिया है, परन्तु भविष्य में इसे बढाया भी जा सकता है. उन्होंने कहा की जगदलपुर से रायपुर के बीच एक नयी ट्रेन शुरू करने का दबाव रेल विभाग द्वारा बनाया जाता रहेगा.
बूढ़ा हो चला ऐतिहासिक दलपत सागर…
© लेखक | January 23, 2012 - 4:22 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. नगर के ऐतिहासिक दलपत सागर की हालात दिनोदिन बद से बदतर होती जा रही है. बताया जाता है की यह सागर छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है और इसे काकतीय राजवंश के राजा दलपत सिंह देव द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व बनवाया गया था. उस वक्त इस स्थान पर बारिश का पानी एकत्रित किया जाता था और उसे फसल के उपयोग में लाया जाता था.
रेलवे प्रशासन हरकत में आया !
© लेखक | January 19, 2012 - 11:51 PM को प्रकाशित किया गया.
जगदलपुर. भाजयुमो द्वारा बस्तर में किये जाने वाले अनिश्चितकालीन रेल रोको आन्दोलन एक ऐसे रिकॉर्ड को तोड़ने की कगार पर आ पहुंचा है जिसे आने वाले भविष्य में तोड़ पाना लगभग असंभव सा हो गया है. गौरतलब है की यह रेल रोको आन्दोलन, आंठवे दिन में प्रवेश कर चुका है लेकिन अभी तक रेल विभाग द्वारा कितनी मांगों पर सहमती दी गयी है, यह कह पाना जरा मुश्किल है. बहराल ऐसी उम्मीद की जा रही है की आने वाले दो-तीन दिनों में ही यह आन्दोलन ख़त्म हो जाएगा.
रेलवे स्टेशन पर बैठे आन्दोलनकारी, कोरापुट से चलने वाली समलेश्वरी एक्सप्रेस का जगदलपुर तक विस्तार के साथ ही साथ रायपुर से जगदलपुर तक की एक इंटर-सिटी एक्सप्रेस सहित रावघाट लाइन के निर्माण का कार्य भी शुरू करने की शर्त पर ही इस आन्दोलन को बंद करने के मूड पर दिखाई दे रहे हैं.








