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कैसे गर्व से कहें की हम भारतीय हैं ?

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हम भारतीय हैं

हमें आज कहते हुए बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है कि हम हिन्दुस्तानी है, हो भी न क्यों ? जहाँ उच्च जाति वाले लोग निम्न जाति वाले से नफ़रत करते है. लक्ज़री गाडियों से चलने वाले ऑटो वाले से नफ़रत करते है. यहाँ पर कि बड़े शहरों में रहने वाले लोग गाँव से आने वाले लोगों से नफ़रत करते है. जहाँ एक राज्य के लोग दुसरे राज्य के लोग से नफ़रत करते है. अंग्रेजी बोलने वाले लोग हिंदी भाषी से नफ़रत करते है. जहाँ नज़र पड़ती है वहां नफरत ही भरी हुई है, जहाँ आये दिन कोई न कोई मुद्दा बनता रहता है.

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आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई …

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गणतंत्र दिवस

26 जनवरी का दिन है… यह दिन सम्पूर्ण भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज (26 जनवरी 2012) से ठीक 22645 दिन पूर्व 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया था. बताया जाता है की पुरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ का गणतंत्र सबसे विशाल है. इस दिन को पुरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ एक राजकीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है.

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शून्य से शिखर तक…

zero शून्य से शिखर तक...

शून्य

आपके पास कितनी गोलाकार चीज़ें हैं, शायद अनगिनत ! क्या कभी आपने सोचा है की इन गोल चीज़ों का जन्म कहाँ से हुआ है ? अगर नहीं सोचा है तो मैं आपको बताता हूँ, यह सभी चीज़ें “शून्य” से ही बनी हैं. जी हाँ, वही शून्य जिससे 1 को 1000 और 1 लाख बनाया जा सकता है. आज की यह दुनिया, शून्य के बगैर नगण्य है, “शून्य” की उत्पत्ति से ही दुनिया काफी छोटी हो गयी है, उधाहरण के लिए एक वाहन को ही ले लीजिये, कोई भी लम्बा सफ़र हो – झट से पूरा हो जाता है.

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सूचना का अधिकार – जनता में जानकारी का अभाव !

right to information सूचना का अधिकार   जनता में जानकारी का अभाव !

सूचना का अधिकार

देश की 40% जनता, इस देश के कानून की कई कड़ियों से आज भी बेखबर है. देश में कई कानून केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाये गए हैं, लेकिन इन सब जानकारियों के अभाव में आम जनता को ही इसके गलत परिणामों का खामियाजा भुगतना पड़ता है.

ऐसा ही एक कानून 12 अक्टूबर, 2005 को “सूचना का अधिकार” (Right To Information, आर. टी. आई.) नाम से संसद द्वारा पारित किया गया था. आज भी इस कानून से कई लोग पूर्ण रूप से जानकारी नहीं रखते हैं.

इस कानून का निर्माण, भारत से भ्रष्टाचार को रोकने हेतु किया गया था और यह कानून अपने उद्देश्य में बहुत हद तक सफल भी हुआ. संक्षेप में अगर कहा जाए तो इस कानून में भारत के सभी नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है की वे सरकारी दस्तावेजों एवं सरकारी प्रपत्रों में प्रयुक्त जानकारी को देख व इनकी फोटोप्रति सम्बंधित कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं.

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30,000 वर्ष पुराना भीमबैठका आश्रय स्थल…

bheembaithka hunting 30,000 वर्ष पुराना भीमबैठका आश्रय स्थल...

30000 वर्ष पुराने शैल्य चित्र की एक झलक

पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई प्राचीन स्थलों की खोज पुरातात्वक्ताओं और खोजकर्ताओं ने की है. ऐसी ही एक खोज “भीमबैठका पाषण आश्रय स्थल” के रूप में भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में मिली थी. यह स्थान मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है और एक पौराणिक पुरास्थल है. यह स्थल आदिमानव द्वारा बनाये गए शैल चित्रों के लिए मशहूर है.

बताया जाता है की यह स्थान और इसमें बने चित्र और कलाकृतियाँ लगभग 30000 वर्ष पुराने हैं और आदिमानवों के द्वारा बनाये गए थे. खोजकर्ताओं ने इस स्थान में अनमोल शैल चित्रों के अलावा लघुस्तूप, पाषाण भवन के अवशेष, गुप्त कालीन अवशेष, शंख अभिलेख, और परमार कालीन मंदिर की भी खोज की थी.

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